PAN

PAN / General

Permanent Account Number (PAN) is a ten-digit alphanumeric identifier, issued by Income Tax Department. Each assessee (e.g. individual, firm, company etc.) is issued a unique PAN.

All existing assessees or taxpayers or persons who are required to file a return of income, even on behalf of others, must have a PAN. Any person, who intends to enter into economic or financial transactions where quoting PAN is mandatory, must also have a PAN.

Section 160 of IT Act, 1961 provides that a minor, lunatic, idiot, mentally retarded, deceased, wards of court and such other persons may be represented through a Representative Assessee.

In such cases,

  • In the application for PAN, details of the a minor, lunatic, idiot, mentally retarded, deceased, wards of court, etc. should be provided.
  • Details of representative assessee have to be provided in item 14 of the application for PAN.
Yes, it is compulsory to quote PAN on return of income.

Permanent Account Number (PAN), as the name suggests, is a permanent number and does not change.

Changing the address though, may change the Assessing Officer. Such changes must, therefore, be intimated to ITD so that the PAN database of ITD can be updated. One can intimate change in address by filling up the form for Request for New PAN Card or/and Changes or Correction in PAN data. This form can be submitted at any TIN-FC or online at NSDL-TIN website.

No. Obtaining/possessing more than one PAN is against the law and may attract a penalty up to 10,000. Therefore, it is advisable not to obtain/possess more than one PAN.

If you have more than one PAN, you should surrender the additional PAN(s) by logging into ITD website at http://www.incometaxindia.gov.in/Pages/default.aspx. Alternatively, you may fill and submit PAN Change Request application form by mentioning the PAN which you wish to retain on the top of the form. All other PAN/s inadvertently allotted to you should be mentioned at item no. 11 of the form and the corresponding PAN card copy/ies should be submitted for cancellation along with the form.

स्थायी खाता संख्या अर्थात् पर्मानेंट अकाउंट नंबर (पैन) दस अंकों का एक अल्‍फा-न्‍यूमेरिक पहचानक (आइडेंटिफ़ायर) है जिसे आयकर विभाग द्वारा जारी किया जाता है. प्रत्‍येक एसेसी (जैसे व्‍यक्ति, फर्म, कंपनी आदि) को यह विशिष्‍ट पैन जारी किया जाता है.

सभी मौजूदा कर=निर्धारितियों (एसेसीज) या करदाताओं या ऐसे व्यक्तियों के पास पैन होना चाहिए जिनको भले ही दूसरों की ओर से आय कर रिटर्न दाखिल करनी हो. किसी व्यक्ति का कोई ऐसे आर्थिक या वित्तीय लेनदेन करने का इरादा है, जिसके लिए पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसके पास पैन होना चाहिए.

आयकर अधिनियम, १९६१ की धारा १६० में यह प्रावधान है कि अवयस्क, पागल, मूर्ख, मानसिक रूप से विक्षिप्त, दिवंगत, कोर्ट पर आश्रित व्यक्तियों तथा ऐसे अन्य व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व `प्रतिनिधि कर-निर्धारिती (एसेसी )' कर सकते हैं.

ऐसे मामलों में,

  • पैन आवेदन में अवयस्क, पागल, मूर्ख, मानसिक रूप से विक्षिप्त, दिवंगत, कोर्ट पर आश्रित व्यक्तियों आदि का विवरण दिया जाना चाहिए.
  • `प्रतिनिधि कर निर्धारिती (एसेसी)' का विवरण पैन आवेदन के मद संख्या १४ में दिया जाना चाहिए.

हाँ, आय रिटर्न में पैन उद्धृत करना अनिवार्य है.

स्थायी खाता संख्या (पैन) एक स्थायी नंबर है जैसाकि इससे नाम से ही पता चलता है और यह बदलता नहीं है.

हालांकि पते में परिवर्तन होने से कर निर्धारण अधिकारी बदल जायेगा. अत: ऐसे परिवर्तन के बारे में आयकर विभाग को सूचित किया जाना चाहिए ताकि आयकर विभाग के पैन डेटाबेस को अपडेट किया जा सके. आप `नया पैन कार्ड या/और पैन डेटा में परिवर्तन या संशोधन के लिए अनुरोध' फॉर्म भरकर पते में परिवर्तन के बारे में सूचित कर सकते हैं. यह फॉर्म टिन-एफसी या एनएसडीएल-टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकते हैं.

एक अधिक पैन लेना/रखना गैर-कानूनी है और इसके लिए १०,००० रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. अत: यह सलाह दी जाती है कि एक से अधिक पैन लेना/रखना नहीं चाहिए. यदि आपके पास एक से अधिक पैन हैं तो आईटीडी की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर जाकर अप्रयुक्त पैन को लौटा दें.